मुंबई पुलिस ने महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी समेत 12 लोगों के नामजद मुकदमे और 350 अन्य के खिलाफ गामदेवी पुलिस थाने में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 10 अक्टूबर को बांद्रा में हुए प्रदर्शन के सिलसिले में की गई, जिसमें चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। पुलिस के मुताबिक हिरासत में लिए गए करीब 600 प्रदर्शनकारियों को बाद में रिहा कर दिया गया।
तुषार गांधी, जो "हम भारत के लोग" संगठन के प्रमुख हैं, को 10 अक्टूबर की सुबह साढ़े नौ से दस बजे के बीच बांद्रा से हिरासत में लिया गया था। उनका काफिला अगस्त क्रांति मैदान में नियोजित जनसभा की ओर बढ़ रहा था, जिसे पुलिस ने रोक दिया। उन्हें पहले डीएन नगर थाने और फिर बोरीवली पुलिस थाने ले जाया गया, और करीब 8 घंटे की हिरासत के बाद रिहा किया गया।
पुलिस का तर्क और विपक्ष का विरोध
मुंबई पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी और अगस्त क्रांति मैदान निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है। जोन-2 के डीसीपी रागसुधा आर के मुताबिक बिना अनुमति जमा भीड़ को हटाने की कार्रवाई की गई। वहीं विपक्षी नेताओं — आदित्य ठाकरे, संजय राउत और अनिल परब — ने पुलिस थाने के बाहर पहुंचकर हिरासत का विरोध किया और इसे लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश बताया।
गौरतलब है कि तुषार गांधी को हिरासत में लेने से पहले उनके घर के बाहर भी पुलिस तैनात की गई थी। इस घटना ने महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है, जिस पर पहले ही विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए थे।
मुख्य बातें
- गामदेवी थाने में 12 नामजद + 350 अन्य पर FIR।
- बांद्रा से 10 अक्टूबर सुबह हिरासत में लिए गए तुषार गांधी।
- 8 घंटे बाद रिहाई; प्रदर्शन में 600 लोग हिरासत में।
- सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन।
- आदित्य ठाकरे, संजय राउत ने थाने पहुंचकर विरोध जताया।
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