यवतमाल जिले में खरीफ सीजन में बारिश के खंड से बनी सूखे जैसी स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार के अंतर-मंत्रालयीन दल ने 10 अक्टूबर को जिले के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा किया। दल ने किसानों के खेतों में जाकर कपास, सोयाबीन और तूर की फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
दल ने यवतमाल तालुका के मडकोना और लासिना तथा नेर तालुका के लोणी, मांडवगड, वटफळी और दोडकी गांवों का दौरा किया। इस दौरान फसलों की बढ़वार, बारिश के खंड से हुई क्षति और कृषि उत्पादन पर संभावित असर का आकलन किया गया। दौरे के दौरान दल ने आत्महत्या कर चुके किसान के परिवार से भी मुलाकात कर उनकी व्यथा जानी।
केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
दल में जलसंपदा विभाग के संचालक अर्जेश कुमार मधोक (दल प्रमुख), वित्त मंत्रालय के सहसंचालक महेश कुमार, कृषि विभाग की अवर सचिव सीमा रानी और ग्रामीण विकास विभाग के अवर सचिव संजय मीना शामिल थे। दल ने श्री गौरक्षण संस्था में पशुधन और चारा व्यवस्था तथा किटा कापरा लघुसिंचन प्रकल्प में पानी की स्थिति का निरीक्षण किया। दौरे में जिलाधिकारी विकास मीना और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी मनोजकुमार ढगे सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस निरीक्षण की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद सूखाग्रस्त किसानों की मदद पर आगे की कार्रवाई होगी। एबीपी माझा की स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक धाराशिव, बीड, यवतमाल और सोलापूर सहित कई इलाकों में केंद्रीय दल ने 10 अक्टूबर को निरीक्षण किया और सूखे से हुए बड़े नुकसान को स्वीकार किया।
मुख्य बातें
- 10 अक्टूबर को यवतमाल में केंद्रीय दल का दौरा।
- मडकोना, लासिना, लोणी, मांडवगड, वटफळी, दोडकी गांवों में पाहणी।
- कपास, सोयाबीन, तूर की फसलों का निरीक्षण।
- आत्महत्याग्रस्त किसान के परिवार से मुलाकात।
- रिपोर्ट केंद्र को — मदद पर आगे फैसला।
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