भंडारा: विदर्भ के 'धान के कटोरे' कहलाने वाले भंडारा जिले में लंबे सूखे और कीट-प्रकोप से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है — कुछ गांवों में फसल पूरी तरह नष्ट होने की जानकारी है। जिले में धान की खेती करीब 1.83 लाख हेक्टेयर में होती है, और यह सीजन किसानों के लिए सबसे मुश्किल सीजनों में से एक साबित हो रहा है।
भंडारा के पालकमंत्री पंकज भोयर ने अधिकारियों को Trigger-1 के तहत नुकसान-मूल्यांकन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया — "किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, सरकार पूरी ताकत से साथ खड़ी है।"
पृष्ठभूमि में भंडारा, पवनी और लाखांदूर को 27 सितंबर को Trigger-1 में सूखाग्रस्त घोषित किया गया था; 1 अक्टूबर को कैबिनेट उप-समिति ने तुमसर, मोहाड़ी समेत 19 अतिरिक्त तालुकों में सर्वेक्षण के आदेश दिए थे। कृषि विभाग के अनुसार भंडारा-गोंदिया में धान की फसल में करीब 30 से 40 प्रतिशत नुकसान की जानकारी सामने आई है — जिस समय धान को बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी समय पानी नहीं मिला।
भंडारा के किसानों का कहना है कि लागत बढ़ने और मौसम की अनिश्चितता के बीच अब सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया ही उनकी उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि पंचनामे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है ताकि वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को जल्द राहत मिल सके।
जिले में करीब 1.83 लाख हेक्टेयर में धान की खेती — कुछ गांवों में फसल पूरी तरह नष्ट
- भंडारा में सूखे और कीट-प्रकोप से धान की फसल बर्बाद; जिले में 1.83 लाख हेक्टेयर में होती है धान की खेती
- पालकमंत्री पंकज भोयर ने Trigger-1 के तहत नुकसान-मूल्यांकन तेज करने के निर्देश दिए; किसानों को आश्वासन — अकेला नहीं छोड़ा जाएगा
- कृषि विभाग के अनुसार भंडारा-गोंदिया में धान की फसल को 30-40 प्रतिशत नुकसान की जानकारी
- भंडारा, पवनी, लाखांदूर पहले से Trigger-1 में सूखाग्रस्त; तुमसर-मोहाड़ी समेत 19 तालुकों में सर्वेक्षण के आदेश
Comments
Post a Comment