चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताई हैं। खामियां दूर होने तक याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं होगी।
आपत्तियों में 220 रुपये की कोर्ट फीस की कमी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की अपठनीय प्रति और 11 में से 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे गायब होना शामिल है। रजिस्ट्री ने 24 जून 2025 के चुनाव आयोग के फैसले की प्रति और 'सिमिलैरिटी पैरा' भी मांगा है।
रजिस्ट्री ने यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी क्यों बनाया गया है।
गौरतलब है कि खामी की सूचना प्रक्रिया-गत आपत्ति है, याचिका का खारिज होना नहीं। नेताओं ने सोमवार 12 अक्टूबर को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके याचिका दायर की थी; अनधिकृत मार्च पर दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत FIR दर्ज की है। SC के NJDG डैशबोर्ड पर 13 अक्टूबर को जांच/खामी/सूचीबद्धता-लंबित श्रेणी में 11,167 मामले दिखे।
मुख्य बातें
- 14 खामियां: 220 रुपये फीस घटी, 9 वकालतनामे गायब
- खरगे के ID की अपठनीय प्रति, ECI के 24 जून फैसले की प्रति मांगी
- अनुच्छेद 32 में व्यक्तिगत ECs को प्रतिवादी बनाने पर सवाल
- खामी सूचना प्रक्रिया-गत है — याचिका खारिज नहीं हुई
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