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SC का अहम फैसला: धोखाधड़ी से शुरू दिवाला प्रक्रिया रद्द कर सकता है NCLT, पर CIRP स्वतः खत्म नहीं होगी

SC का अहम फैसला: धोखाधड़ी से शुरू दिवाला प्रक्रिया रद्द कर सकता है NCLT, पर CIRP स्वतः खत्म नहीं होगी

SC का अहम फैसला: धोखाधड़ी से शुरू दिवाला प्रक्रिया रद्द कर सकता है NCLT, पर CIRP स्वतः खत्
धोखाधड़ी से शुरू दिवाला प्रक्रिया रद्द कर सकता है NCLT, पर CIRP स्वतः खत्म नहीं होगी
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को बड़ा फैसला देते हुए कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT)

नई दिल्ली | 30 सितंबर — सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को बड़ा फैसला देते हुए कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) दिवाला प्रक्रिया की स्वीकृति को रद्द कर सकता है, अगर बाद में पता चले कि प्रक्रिया शुरू करने वाले मूल तथ्य — जैसे ऋण का अस्तित्व — धोखाधड़ी और मिलीभगत से बनाए गए थे। न्यायमूर्ति पीएस नरसिंह और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि 'ज्यूरिस्डिक्शनल फैक्ट्स' किसी अदालत या ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र की पूर्व-शर्त होते हैं, और दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की धारा 7, 9 या 10 के तहत प्रक्रिया इन्हीं मूल तथ्यों पर टिकी होती है।

यह मामला गुरुग्राम की ग्रीनोपोलिस आवासीय परियोजना से जुड़ा था — 'ऑरिस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम राकेश कुमार गुप्ता'। अपील में NCLAT के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ऑपरेशनल क्रेडिटर द्वारा मिलीभगत से दिवाला प्रक्रिया शुरू कराए जाने के निष्कर्ष पर पूरी CIRP रद्द कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT का आदेश पलट दिया और CIRP संख्या IB-2721/ND/2019 बहाल कर दी।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी का निष्कर्ष मिलते ही पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त नहीं होगी। एक बार दिवाला याचिका स्वीकार हो जाए तो वह 'इन-रेम' प्रकृति की हो जाती है — सभी लेनदार हितधारक बन जाते हैं और कंपनी का प्रबंधन रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास चला जाता है। ऐसे में ट्रिब्यूनल को रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की सुनवाई करनी होगी, कर्जदाताओं की समिति (CoC) और अन्य हितधारकों की राय लेनी होगी, और यह तय करना होगा कि ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया जारी रह सकती है या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल को लगे कि प्रक्रिया धोखाधड़ी या मिलीभगत से शुरू हुई थी, तो वह मूल आवेदक को हिस्सा लेने से रोक सकता है और संहिता की धारा 65 के तहत कार्रवाई भी शुरू कर सकता है। ट्रिब्यूनल को अब परियोजना के स्वामित्व सहित सभी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करके जल्द फैसला लेना होगा। अवमानना याचिकाएं बंद कर दी गईं।

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