लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने सोमवार (12 अक्टूबर) को संसद में दावा किया कि RAF फेयरफोर्ड एयरबेस को निशाना बनाने की कथित साजिश बहुत संभवतः ईरान में समन्वित और लगभग निश्चित रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा निर्देशित थी। यह बेस अमेरिकी बमवर्षकों द्वारा ईरान पर हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
कथित साजिश का खुलासा तब हुआ जब 27 सितंबर की सुबह तीन वैन में सवार पांच ब्रिटिश नागरिकों को बेस के पास आतंकवाद और विस्फोटक अपराधों के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें कड़ी शर्तों पर पुलिस जमानत पर बिना आरोप रिहा कर दिया गया। वैन में पेट्रोल तो मिला, लेकिन कोई काम का विस्फोटक नहीं मिला था। ब्रिटिश-ईरानी नागरिक समेत दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर रिहा किया गया।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि ईरान से जुड़ी ड्रोन हमले की कथित साजिश थी, और पिछले हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण बमवर्षक विमानों को बेस से हटाया गया। ब्रिटिश PM ने कहा कि अपनी धरती पर इन खतरों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और IRGC की क्षमता सीमित करने के लिए और प्रतिबंधों की घोषणा की।
ईरान ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण अटकलें बताया। ब्रिटेन में ईरान के राजदूत ने कहा कि तेहरान का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। इस बीच अमेरिका और ब्रिटेन समेत 29 देशों ने सोमवार को संबद्ध क्षेत्र के खिलाफ ईरानी कार्रवाइयों की संयुक्त निंदा भी की।
मुख्य बातें
- RAF फेयरफोर्ड साजिश IRGC की: ब्रिटिश PM
- 27 सितंबर को 5 ब्रिटिश नागरिक गिरफ्तार हुए थे
- ट्रंप ने बमवर्षक बेस से हटाए थे: खतरा
- 29 देशों ने ईरान की कार्रवाई की निंदा की
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