नागपुर: विधानपरिषद की नागपुर डिविजन स्नातक सीट के लिए नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर बीत गई है, और मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को उतारा है, कांग्रेस के मौजूदा MLC अधिवक्ता आब्जीट वंजारी मैदान में हैं, जबकि टिकट न मिलने से नाराज पूर्व-MLC प्रो. अनिल सोले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में डटे हुए हैं।
सोले ने 2014 से 2020 तक भाजपा के MLC के रूप में इसी सीट का प्रतिनिधित्व किया था। इस बार पार्टी के नामांकन के दावेदारों में वे भी थे, लेकिन भाजपा ने कोहले को चुना। नाराज सोले ने 5 अक्टूबर को निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण खुद सोले के आवास गए और नाम वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन प्रयास बेनतीजा रहा।
भाजपा खेमे में चिंता है कि पूर्व-MLC की निर्दलीय उम्मीदवारी से वोटों का बंटवारा हो सकता है। हालांकि वास्तविक असर फाइनल उम्मीदवार सूची और मतदान पर निर्भर करेगा। पार्टी ने नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, गडचिरोली और चंद्रपुर में जिला-विधानसभा स्तर की चुनाव मशीनरी सक्रिय कर दी है — 2020 में कांग्रेस से हारी सीट वापस पाने को पार्टी ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया है।
इस निर्वाचन क्षेत्र में छह जिले आते हैं — नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, गडचिरोली और चंद्रपुर। मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को।
नागपुर स्नातक सीट — मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को नाम वापसी की डेडलाइन खत्म; त्रिकोणीय मुकाबला तय
- भाजपा: सुधाकर कोहले; कांग्रेस: आब्जीट वंजारी; निर्दलीय: अनिल सोले
- टिकट न मिलने पर सोले की बगावत; रवींद्र चव्हाण की मनाने की कोशिश बेनतीजा
- 2014-2020 में सोले भाजपा के MLC थे इसी सीट से
- 23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना; 6 जिले शामिल
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