बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे सुरक्षा क्षेत्र में बने अनधिकृत झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने के लिए सेंट्रल रेलवे को हरी झंडी दे दी है। जस्टिस भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुर्ला ईस्ट के राजीव गांधी नगर के सात निवासियों की याचिका खारिज कर दी, जिसमें रेलवे की जमीन पर कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि ये झुग्गियां पटरियों के 10 मीटर के बफर और सुरक्षा क्षेत्र में आती हैं, जो रेलवे के सुचारु संचालन में बाधा डालती हैं और वहां रहने वालों की जान को भी खतरे में डालती हैं।
अतिक्रमण हटाने की अनुमति के साथ ही कोर्ट ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत की शर्तें भी रखी हैं। मुंबई उपनगर के कलेक्टर को ध्वस्तीकरण से पहले झुग्गियों में रहने वाले परिवारों की पहचान और प्रोफाइल दर्ज करने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रभावित घरों की संख्या तय हो सके और सहायता की पात्रता का आकलन किया जा सके।
पुनर्वास की शर्तें
कोर्ट ने हर ध्वस्त ढांचे के लिए छह महीने तक हर महीने 2,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश भी दिया है। यह खर्च रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगे। साथ ही, मुंबई उपनगर के कलेक्टर और स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) को प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं के तहत पात्र परिवारों के लिए आवास विकल्प तलाशने को कहा गया है — यह प्रक्रिया छह महीने में पूरी करनी होगी। लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बेदखल निवासी उसी जगह पर वैकल्पिक आवास की मांग नहीं कर सकते, जहां से उनके ढांचे हटाए गए हैं।
बेंच ने कहा कि रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त रखना रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसके लिए सिर्फ स्थानीय अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट के तहत शुरू कार्यवाही 2022 में ही अंतिम रूप ले चुकी थी, फिर भी कोर्ट ने सेंट्रल रेलवे को निवासियों को 30 दिन का नया नोटिस देने का निर्देश दिया है। तय समय में न हटने पर रेलवे पुलिस संरक्षण के साथ बेदखली और ध्वस्तीकरण कर सकता है; संबंधित पुलिस अधीक्षक या आयुक्त को मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया गया है।
मुख्य बातें
- कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के अतिक्रमण हटाने की अनुमति।
- राजीव गांधी नगर के निवासियों की याचिका खारिज।
- 30 दिन का नया नोटिस देने का निर्देश।
- हर ध्वस्त ढांचे पर 2000 रुपये मासिक, 6 महीने तक।
- एसआरए के तहत 6 महीने में आवास विकल्प तलाशने को कहा।
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