सूखे की मार झेल रहे जालना जिले के करीब 6 लाख किसानों से सीधा संवाद साधने के लिए जिला प्रशासन ने "शेतकरी संवाद सभा" उपक्रम शुरू किया है। जिले के आठों तालुकों में तीन सदस्यीय टीमें गांव-गांव जाकर संकटग्रस्त किसानों से बातचीत कर रही हैं। हर टीम में एक कृषि सहायक, एक तलाठी और एक पुलिस पाटिल शामिल हैं, और चर्चा गांव के सरपंच की मौजूदगी में होती है।
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल के मुताबिक इस पहल का मकसद परेशान किसानों को अपना दर्द साझा करने का मौका देना है, ताकि भावनात्मक तनाव कम हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों को कोई भी चरम कदम नहीं उठाना चाहिए और किसी भी समस्या पर तुरंत स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। टीमों को अगले आदेश तक हर गांव में पंद्रह दिन में एक बार यह संवाद सत्र जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बातचीत में किसानों ने पीने के पानी, मवेशियों के चारे और बढ़ते कर्ज के दबाव पर चिंता जताई है। जालना में इस साल जनवरी से अब तक 60 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं। जाफराबाद तालुके के खासगाव गांव के सरपंच संतोष लोखंडे के मुताबिक, गांव के 90 प्रतिशत से ज्यादा किसानों ने खरीफ के लिए कर्ज लिया था, लेकिन फसल बर्बाद होने से चुकौती अब असंभव हो गई है। कई गांवों में चारा खत्म होने की कगार पर है, जिससे किसानों को शहरों की ओर पलायन का डर सता रहा है।
मुख्य बातें
- जालना के 8 तालुकों में 'शेतकरी संवाद सभा' — कृषि सहायक, तलाठी और पुलिस पाटिल की टीमें गांव-गांव जाएंगी
- लक्ष्य: 900 गांवों के करीब 6 लाख किसानों से सीधा संवाद, हर 15 दिन में सत्र
- जिलाधिकारी आशिमा मित्तल का संदेश — चरम कदम न उठाएं, समस्या पर अधिकारियों से संपर्क करें
- किसानों की मुख्य चिंता: पीने का पानी, मवेशियों का चारा और कर्ज का बढ़ता दबाव
- जालना में जनवरी से अब तक 60 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज
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