दिल्ली पुलिस (नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ) ने अंतर-राज्यीय फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों में PwD कोटे में दाखिले के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनाता था। पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 27 फर्जी सर्टिफिकेट बरामद किए हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि रैकेट UDID रिकॉर्ड्स में हेरफेर करता था और इसमें उत्तर प्रदेश के CMO कार्यालयों के कर्मचारियों की मिलीभगत थी। बदायूं, बरेली, सिद्धार्थ नगर और गोरखपुर जैसे जिलों के आधार पतों को AI टूल्स से बदला जाता था। यह मामला 31 अगस्त को सामने आया था, जब इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत को सूचना मिली थी; गिरफ्तारियां 31 अगस्त से 19 सितंबर के बीच हुईं।
मुख्य आरोपी ललित कुमार उर्फ आदित्य (36) है, जो अलीगढ़ (UP) का रहने वाला है और फरीदाबाद में रहता था। उसके पास से बदायूं, बरेली और सिद्धार्थ नगर के 16 सर्टिफिकेट बरामद हुए। पुलिस ने लैपटॉप, मैकबुक, डेस्कटॉप, 11 मोबाइल फोन, 75,000 रुपये नकद और एक मर्सिडीज कार भी जब्त की है।
गिरफ्तार लोगों में एजुकेशन कंसल्टेंट, एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर, बरेली दिव्यांगता बोर्ड के सदस्य, एक सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर और एक जूनियर असिस्टेंट शामिल हैं। डॉक्टरों और छात्रों की भूमिका की जांच जारी है और और संदिग्धों की तलाश चल रही है।
मुख्य बातें
- 31 अगस्त को टिप से खुला मामला
- UDID रिकॉर्ड में हेरफेर
- 16 सर्टिफिकेट मुख्य आरोपी से
- लैपटॉप, 11 फोन, मर्सिडीज जब्त
- और संदिग्धों की तलाश जारी
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