राज्य सरकार ने सूखे की पृष्ठभूमि में विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन धाराशिव जिले के कॉलेजों में विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क वसूला जा रहा है। विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद ठाकरे गट के विधायक कैलास पाटील ने कळंब शहर के कॉलेज में जाकर प्रशासन से जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील से फोन पर बात कर शुल्क वसूली तुरंत रोकने की मांग की।
कॉलेज प्रशासन ने बचाव में कहा कि महाडीबीटी के माध्यम से छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों से शुल्क भरवाने के विद्यापीठ के निर्देश हैं। इस पर विधायक पाटील ने कहा कि महाडीबीटी की वेबसाइट 2025 से बंद है और 2026 में भी शुरू नहीं हुई — ऐसे में परतावा (रिफंड) मिलने का आश्वासन विद्यार्थियों को गुमराह करना है। पिछले साल अतिवृष्टि के समय वसूला गया शुल्क भी अब तक विद्यार्थियों को वापस नहीं मिला है।
शून्य शुल्क पर अर्ज स्वीकारने की मांग
विधायक पाटील ने मांग की कि दसवीं-बारहवीं बोर्ड की तरह विद्यापीठों की परीक्षा अर्ज प्रणाली में भी सुधार हो — पहले पैसे लेकर बाद में परतावा देने के बजाय शुरुआत से ही पात्र विद्यार्थियों के अर्ज शून्य शुल्क पर स्वीकार किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे मंत्री चंद्रकांत पाटील से सीधे मुलाकात भी करेंगे।
सूखे के कारण मराठवाड़ा के किसान और सामान्य परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। घोषणा के बावजूद विद्यार्थियों को अपनी जेब से पैसे भरने पड़ रहे हैं, तो शुल्कमाफी की घोषणा का फायदा क्या — यह सवाल विधायक पाटील ने उठाया है।
मुख्य बातें
- सूखे में शुल्कमाफी की घोषणा के बावजूद धाराशिव के कॉलेजों में परीक्षा फीस वसूली
- विधायक कैलास पाटील ने कळंब के कॉलेज में जाकर प्रशासन से जवाब मांगा
- मंत्री चंद्रकांत पाटील से फोन पर बात; शून्य शुल्क पर अर्ज स्वीकारने की मांग
- महाडीबीटी वेबसाइट 2025 से बंद; पिछले साल का शुल्क भी अब तक परतावा नहीं
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