बुलढाणा जिले में प्याज़ की कीमतों ने आम परिवारों का बजट हिला दिया है। थोक मंडी में भाव प्रति क्विंटल 6,000 रुपये तक पहुंच गया है, जिसके चलते खुदरा बाजार में प्याज़ 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बढ़ती महंगाई से गृहिणियों के घरखर्च का गणित बिगड़ गया है।
जिले के खामगाव, मोताला, संग्रामपुर और मलकापूर तालुकों में सबसे अधिक प्याज़ की खेती होती है। लेकिन इस साल कम बारिश और घटते भूजल स्तर के कारण इन तालुकों में बोआई का क्षेत्र घटने की आशंका जताई जा रही है — जिससे आने वाले सीजन में आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
विक्रेताओं के अनुसार भंडारण में रखा प्याज़ खराब होना और नए प्याज़ की मंडी में सीमित आवक — यही कीमतों में उछाल के दो बड़े कारण हैं। भूजल स्तर गिरने से कुओं और बोरवेल से लंबी अवधि की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं रही है, जिससे रबी सीजन में प्याज़ उगाने वाले किसानों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में प्याज़ की सालाना महंगाई 108.09 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत रही। खरीफ सीजन में बुलढाणा में सोयाबीन जैसी नकदी फसलों का रकबा बड़ा है, साथ ही कपास, उड़द, मूंग और ज्वार की भी खेती होती है — कम बारिश की मार इन सभी फसलों पर पड़ी है। दशहरा-दिवाली के त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने पर प्याज़ के भाव और चढ़ने की आशंका है।
मुख्य बातें
- बुलढाणा: थोक मंडी में प्याज़ 6,000 रुपये क्विंटल तक; खुदरा भाव 60-70 रुपये किलो
- सितंबर में प्याज़ की सालाना महंगाई 108.09%; खुदरा महंगाई दर 5.54%
- खामगाव, मोताला, संग्रामपुर, मलकापुर में रबी बोआई क्षेत्र घटने की आशंका
- भंडारण का प्याज़ खराब, नई आवक सीमित; भूजल गिरने से सिंचाई का संकट
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