बुलढाणा जिले में पानी की किल्लत का संकट गहराता जा रहा है। जिले के सबसे बड़े खडकपूर्णा प्रकल्प का उपयुक्त जलसाठा 28 सितंबर को 5.60 प्रतिशत था, जो 8 अक्टूबर तक घटकर केवल 1.75 प्रतिशत रह गया। यानी दस दिनों में इस प्रकल्प के जलसाठे में 3.85 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
खडकपूर्णा के साथ ही कोराडी प्रकल्प में भी 5.02 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। नळगंगा, पेनटाकळी, ज्ञानगंगा, मन और तोरणा सहित अन्य प्रकल्पों का जलसाठा भी लगातार घट रहा है। खामगाव पाटबंधारे विभाग के उपविभागीय अधिकारी लोकेश बॉबटकार ने बताया कि इस बार मानसून में अपेक्षित बारिश न होने से प्रकल्पों के जलसाठे पर असर पड़ा है; उपलब्ध पानी का किफायत से इस्तेमाल और आगे के पाणीपुरवठे का नियोजन जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार खडकपूर्णा प्रकल्प की कुल क्षमता 93.40 दशलक्ष घनमीटर है और अब केवल कुछ दशलक्ष घनमीटर पानी बचा है — प्रकल्प मृतसाठा स्तर की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सिंचाई के साथ ही पेयजल आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं; ग्रामीण इलाकों की कुओं और हातपंपों की पाणीपातळी भी गिर रही है।
प्रशासन बारिश की स्थिति और प्रकल्पों के जलसाठे की नियमित समीक्षा कर रहा है और जरूरी उपाययोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने नागरिकों से पानी का संयम से इस्तेमाल करने और बर्बादी रोकने की अपील की है।
मुख्य बातें
- खडकपूर्णा प्रकल्प का जलसाठा 10 दिनों में 5.60% से घटकर 1.75% पर आया
- कोराडी प्रकल्प में 5.02% की गिरावट; अन्य प्रकल्पों का साठा भी घटा
- 93.40 दशलक्ष घनमीटर क्षमता वाला प्रकल्प मृतसाठे की ओर; पेयजल संकट की आशंका
- खामगाव पाटबंधारे विभाग: पानी का किफायत से इस्तेमाल जरूरी, नियमित समीक्षा जारी
Comments
Post a Comment