उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का नाम नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लखनऊ में कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस ब्रीफिंग और एक्स पर जारी वीडियो संदेश में इस फैसले का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभारी है, जिन्होंने राज्य को जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उपहार में दिया। कैबिनेट के मुताबिक यह एयरपोर्ट भविष्य में राज्य का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनेगा। नाम बदलने का फैसला प्रधानमंत्री के सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के सम्मान में लिया गया है।
जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च 2026 को किया था और 15 जून 2026 से यहां कमर्शियल उड़ानें शुरू हुईं — पहली फ्लाइट लखनऊ से आई इंडिगो की थी। यह दिल्ली-एनसीआर का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है (आईजीआई के बाद)। एयरपोर्ट को यूपी सरकार और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने पीपीपी मॉडल पर करीब 11,282 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया है।
पहले चरण में एयरपोर्ट की सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है, जिसे बाद में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकेगा। यहां 3,900 मीटर लंबा रनवे है, जो वाइड-बॉडी विमानों को संभाल सकता है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र-राज्य के समन्वय से यूपी विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
मुख्य बातें
- यूपी कैबिनेट ने 9 अक्टूबर को प्रस्ताव मंजूर किया
- सीएम योगी ने लखनऊ में किया ऐलान
- पीएम के 25 वर्ष सार्वजनिक सेवा के सम्मान में फैसला
- लागत 11,282 करोड़ रुपये, पीपीपी मॉडल
- सालाना 1.2 करोड़ से 7 करोड़ यात्री क्षमता
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