
सीजेपी के जंतर-मंतर विरोध के बीच दिल्ली मेट्रो स्टेशनों की बंदी को लेकर शनिवार (10 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर के अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया।
9 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया था कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाए। अदालत ने कहा था कि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
याचिका में क्या आरोप
याचिकाकर्ता अधिवक्ता शैलेंद्र त्रिपाठी का दावा है कि 9 अक्टूबर रात करीब साढ़े नौ बजे जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद पाए गए। डीएमआरसी ने 45 स्टेशनों के गेट रात 9 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रखने की घोषणा की थी। याचिका में गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और डीएमआरसी चेयरपर्सन डी थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में प्रतिबंधात्मक आदेश रद्द करने और अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कारण बताने के निर्देश की मांग की गई है।
मुख्य बातें
- 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर हुई
- 9 अक्टूबर के आदेश में पूर्ण प्रतिबंध पर रोक लगी थी
- 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहने का आरोप
- याचिकाकर्ता ने जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय स्टेशन का दौरा किया
- प्रतिबंध रद्द करने और अधिकारियों से जवाब की मांग
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