महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार 11 अक्टूबर को राज्य को संबोधित करते हुए सूखे से निपटने के लिए राज्यव्यापी सहायता योजना की घोषणा की। इस साल खरीफ सीजन में 147 लाख हेक्टेयर फसल को 40 से 60 दिन तक चले सूखे से नुकसान हुआ है; राज्य में कुल बारिश सामान्य से 18 प्रतिशत कम रही, जबकि 36 में से 31 जिलों में वर्षा की कमी दर्ज हुई — मराठवाड़ा में 38 प्रतिशत और विदर्भ में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई।
265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित
सरकार ने 358 में से 265 तालुकों (32 जिलों, करीब 74 प्रतिशत) को औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां औपचारिक मानदंड पूरे नहीं हुए हैं, वहां भी फसल नुकसान वाले हर गांव और हर किसान को सहायता दी जाएगी। प्रभावित मुख्य फसलों में कपास, सोयाबीन, तूर, मक्का और गन्ना शामिल हैं।
पेयजल सबसे बड़ी प्राथमिकता
फडणवीस ने पेयजल को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया — अगस्त 2027 तक लोगों और पशुओं के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा और रबी सीजन में पेयजल को खेती में न लगाने की अपील की गई है। बड़े पैमाने पर टैंकरों से पानी पहुंचाया जाएगा। 12-सूत्री राहत पैकेज में छात्रों की शुल्क माफी, बिजली बिल में छूट और रोजगार गारंटी योजना में ढील शामिल है। केंद्रीय सूखा आकलन दल के साथ बैठक में अगले 6 से 8 महीनों के लिए रोजगार, खाद्यान्न, पेयजल और चारे की योजना तैयार की गई है; केंद्र से राहत के लिए विस्तृत ज्ञापन भेजा जाएगा।
मुख्य बातें
- CM फडणवीस ने 11 अक्टूबर को राज्यव्यापी सूखा सहायता योजना घोषित की।
- 147 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल को 40–60 दिन के सूखे से नुकसान।
- बारिश सामान्य से 18% कम; मराठवाड़ा -38%, विदर्भ -27%; 36 में से 31 जिले प्रभावित।
- 358 में से 265 तालुके (32 जिले) औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित।
- पेयजल पहली प्राथमिकता: अगस्त 2027 तक लोगों-पशुओं के लिए पानी आरक्षित।
- 12-सूत्री पैकेज: छात्र शुल्क माफी, बिजली बिल में छूट, रोजगार गारंटी में ढील।
- केंद्रीय दल के साथ बैठक: अगले 6–8 महीने की योजना; केंद्र को विस्तृत ज्ञापन।
Comments
Post a Comment