चित्र: Wikimedia Commons (प्रतीकात्मक)
ताज़ा
मौत की सजा में उदारता पर SC सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौत की सजा के मामलों में बढ़ती उदारता पर सख्त टिप्पणी की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की दो-न्यायाधीशों की बेंच ने कहा कि क्षमा की प्रवृत्ति से देश में अपराध बढ़ रहे हैं और "ये कहीं तो खत्म होनी चाहिए।"
बेंच ने कहा कि पहले ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ का सिद्धांत सख्ती से लागू होता था, लेकिन अब मौत की सजा का कम्यूटेशन (आजीवन कारावास में बदलाव) आम हो गया है। बेंच ने स्पष्ट किया कि कम्यूटेशन खुद उदारता का कार्य है, इससे कैदी को ऑटोमैटिक समय-पूर्व रिहाई का अधिकार नहीं मिल जाता।
ये टिप्पणियां एक ऐसे लाइफ कन्विक्ट की समय-पूर्व रिहाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं, जिसकी मौत की सजा पहले कम्यूट की जा चुकी थी।
गौरतलब है कि ये बेंच की मौखिक टिप्पणियां हैं, कोई अंतिम फैसला नहीं। मामले में आगे सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य बातें
- जस्टिस दत्ता और जस्टिस नागू की बेंच की टिप्पणी
- पहले रेयरेस्ट ऑफ रेयर सख्ती से लागू होता था
- अब मौत की सजा का कम्यूटेशन आम हो गया
- कम्यूटेशन से ऑटो रिहाई का हक नहीं मिलता
- लाइफ कन्विक्ट की समय-पूर्व रिहाई याचिका पर सुनवाई
Comments
Post a Comment