दक्षिण कोरिया ने गुरुवार को अपना पहला स्वदेशी हाइपरसोनिक हथियार सफलतापूर्वक टेस्ट-फायर किया। राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने स्वयं रक्षा विकास एजेंसी के टेस्ट साइट पर इस परीक्षण का निरीक्षण किया। हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना तेज उड़ान भरता है और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
परीक्षण के दौरान हथियार बूस्टर रॉकेट से नियत ऊंचाई पर अलग हुआ और फिर वर्टिकल व हॉरिजॉन्टल दोनों तरह के मैन्यूवर करते हुए निर्धारित टेस्ट लक्ष्य को सटीक निशाने से भेदा। यह दक्षिण कोरिया के लिए एक बड़ी तकनीकी छलांग मानी जा रही है, क्योंकि हाइपरसोनिक हथियारों की तकनीक अब तक गिने-चुने देशों के पास ही थी।
राष्ट्रपति ली ने कहा, “दक्षिण कोरिया को अपनी ताकत से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।” उन्होंने उसी दिन देश की सबसे शक्तिशाली ह्यूनमू-5 बैलिस्टिक मिसाइल का भी निरीक्षण किया। सियोल का कहना है कि इस हथियार के ऑपरेशनल होने पर कोरियाई प्रायद्वीप में सरप्राइज स्ट्राइक की क्षमता मिलेगी, जो एक ‘गेम-चेंजिंग’ डिटरेंट साबित होगा।
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब पिछले हफ्ते उत्तर कोरिया ने भी अपना हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट किया था, जो जापान के पास समुद्र में गिरा था। 21 सितंबर को DMZ के पास लैंडमाइन विस्फोटों में उत्तर कोरिया के लगाए डिवाइसों से तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे, जिससे तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
मुख्य बातें
- 8 अक्टूबर को पहला स्वदेशी हाइपरसोनिक टेस्ट
- राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने किया निरीक्षण
- ध्वनि से 5 गुना तेज, डिफेंस सिस्टम को चकमा
- बूस्टर से अलग होकर लक्ष्य पर सटीक प्रहार
- उत्तर कोरिया के टेस्ट के एक हफ्ते बाद परीक्षण
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