सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली-NCR में महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को कड़े निर्देश दिए। ‘In Re: Recent rape incidents in Delhi NCR’ शीर्षक वाले स्वप्रेरणा मामले में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को शैक्षणिक संस्थानों — स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटरों — के आसपास बीट पेट्रोलिंग बढ़ाने का आदेश दिया। छात्र-छात्राओं के आने-जाने के समय, यानी सुबह और शाम, नियमित और साफ दिखाई देने वाली पुलिस मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सार्वजनिक परिवहन के ड्राइवरों और सहायकों के सख्त सत्यापन के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकारी और निजी बसों, टैक्सियों, Ola-Uber-Rapido जैसी ऐप-आधारित कैबों और ऑटो-रिक्शा में सिर्फ पंजीकृत और सत्यापित व्यक्ति ही वाहन चला सकेगा। हर वाहन पर सत्यापित ड्राइवर का नाम और फोटो यात्रियों को साफ दिखने वाली जगह लगाना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने बिना अनुमति चल रही शराब की दुकानों और प्रतिष्ठानों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई (सीलिंग सहित) के निर्देश दिए। गश्त और CCTV की रियल-टाइम निगरानी के लिए कंट्रोल-रूम कमांड सेंटर यानी ‘वॉर रूम’ बनाने, सरप्राइज चेकपॉइंट लगाने और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को भी कहा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली परिवहन विभाग को नोटिस जारी कर दिल्ली सरकार से अनुपालन हलफनामा मांगा गया है; अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
मुख्य बातें
- स्कूल-कॉलेज के पास बीट पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश
- कैब, बस, ऑटो ड्राइवरों का सख्त सत्यापन अनिवार्य
- हर वाहन पर ड्राइवर का नाम-फोटो दिखाना होगा
- बिना लाइसेंस शराब दुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई
- 5 अक्टूबर का आदेश 8 अक्टूबर को अपलोड, अगली सुनवाई 16 नवंबर
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