केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान मीडिया ब्रीफिंग में कहा — "भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता।" यह बयान एलन मस्क के उन आरोपों के जवाब में आया है, जिनमें मस्क ने गुरुवार को एक्स पर लिखा था — "क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?" — और आरोप लगाया था कि मुकेश अंबानी अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके भारत में स्टारलिंक के लॉन्च को रोक रहे हैं। मस्क ने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया था।
सिंधिया ने कहा कि तीन कंपनियों — मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट शाखा जियो सैटकॉम और भारती-समर्थित यूटेलसैट वनवेब — को सैटेलाइट संचार (सैटकॉम) लाइसेंस मिल चुका है। "हम तकनीक के मामले में तटस्थ हैं... हमारा काम हर ग्राहक को सेवाओं का समूह देना है। ग्राहक को स्वतंत्र बाजार में चुनने दें कि वह किस कंपनी की सेवा चाहता है," सिंधिया ने कहा। उन्होंने बताया कि अमेज़न की कुइपर ने भी रुचि दिखाई है और उसे स्थापित प्रक्रिया से गुजरना होगा।
गुरुवार को ही सरकार ने कहा था कि स्टारलिंक समेत तीनों लाइसेंस प्राप्त सैटेलाइट ऑपरेटर मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण पर हैं; अनुचित या भेदभावपूर्ण प्रक्रिया के सुझाव "बेबुनियाद और गलत धारणा" हैं। स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन व्यावसायिक लॉन्च के लिए अभी सुरक्षा अनुपालन शर्तें और स्पेक्ट्रम आवंटन बाकी है। रिलायंस जियो ने मस्क के आरोपों पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को सिंधिया की मीडिया ब्रीफिंग
- मस्क के अंबानी-आरोप का खंडन
- तीन सैटकॉम लाइसेंस जारी
- चार्ज सिस्टम तय होने पर स्पेक्ट्रम
- जियो ने टिप्पणी से इनकार
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