भंडारा: सीजेपी के आंदोलन को लेकर भाजपा नेता डॉ. परिणय फुके ने भंडारा में पत्र परिषद में तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन उसके उद्देश्य और पीछे के एजेंडे की जानकारी जनता के सामने होना जरूरी है। फुके ने आरोप लगाया कि सीजेपी पहले छात्रों के मुद्दों को लेकर आंदोलन करती थी, लेकिन अब उसकी गतिविधियों में राजनीतिक एजेंडा साफ दिखाई दे रहा है।
डॉ. फुके ने केंद्र और राज्य सरकार से सीजेपी को मिलने वाली कथित विदेशी फंडिंग की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के जरिए देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। फुके ने सवाल उठाया कि कहीं देश में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सीजेपी द्वारा मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने के दावे पर भी फुके ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर आंदोलन खड़ा करना उचित नहीं है — ऐसे गंभीर आरोपों के लिए आधिकारिक आंकड़े और ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके पर भाजपा विरोधी एजेंडे के तहत आंदोलन करने का आरोप लगाते हुए फुके ने कहा कि यदि सीजेपी राजनीतिक भूमिका निभाना चाहती है तो उसे अपना एजेंडा स्पष्ट करना चाहिए और खुले तौर पर राजनीतिक दल के रूप में सामने आना चाहिए। फुके ने आरोप लगाया कि सीजेपी केवल भाजपा शासित राज्यों में ही आंदोलन कर रही है — पंजाब और झारखंड में ऐसे मुद्दे होने के बावजूद वहां आंदोलन क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने दिपके को आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता बताते हुए उनके अमेरिका दौरे और कथित फंडिंग की भी जांच की मांग की। गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय पहले ही सीजेपी की विदेशी फंडिंग से जुड़े वायरल दावों पर स्थिति स्पष्ट कर चुका है।
फुके ने क्या-क्या आरोप लगाए
- भंडारा में पत्र परिषद: भाजपा नेता डॉ. परिणय फुके ने सीजेपी की कथित विदेशी फंडिंग की जांच केंद्र और राज्य सरकार से मांगी
- आरोप — पहले छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन करने वाली सीजेपी में अब राजनीतिक एजेंडा; आंदोलन से देश में अराजकता फैलाने की कोशिश
- SIR पर सीजेपी के 13 करोड़ नाम हटने के दावे पर सवाल — कहा, सिर्फ अखबार की खबर पर आंदोलन ठीक नहीं, आधिकारिक आंकड़े लाए जाएं
- अभिजीत दिपके को बताया AAP कार्यकर्ता; उनके अमेरिका दौरे और कथित फंडिंग की भी जांच की मांग — सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में आंदोलन क्यों?
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