भंडारा: जिले के धोप गांव के किसान राजेंद्र सपाटे ने गुरुवार (8 अक्टूबर) की सुबह गांव के कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि इस साल पावस ने दगा देने से उनकी करीब 5 एकड़ की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, जिससे वे टूट चुके थे।
ग्रामीणों ने सपाटे को कुएं से बाहर निकालने के लिए तुरंत दौड़ लगाई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पुलिस ने घटनास्थल का दौरा कर पंचनामा शुरू कर दिया है। खबर फैलते ही पूरे भंडारा जिले में संतप्त प्रतिक्रियाएं उमड़ पड़ीं और गांव में तनाव का माहौल है।
खास बात यह है कि महज 5 दिन पहले, 3 अक्टूबर को पालकमंत्री पंकज भोयर के दुष्काळी पाहणी दौरे के दौरान सपाटे ने मंत्री के सामने आंखों में आंसू लेकर अपनी व्यथा मांडली थी। उन्होंने कहा था कि खेतों को पानी नहीं मिल रहा और परिवार का उदरनिर्वाह कैसे होगा। अब उनकी मौत ने प्रशासन के दुष्काळ निवारण उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के जिलाध्यक्ष चरण वाघमारे ने कहा कि अगर किसानों के दुख की कीमत उनकी मौत के बाद सरकार चुकाएगी तो यह अत्यंत वेदनादायी है। बताया जा रहा है कि तुमसर-मोहाडी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को दुष्काळग्रस्त सूची से बाहर रखने पर भी किसानों में नाराजी है।
धोप: दुष्काळ की मार — 5 एकड़ धान बर्बाद, पालकमंत्री के सामने रोया था किसान
- भंडारा के धोप गांव में 8 अक्टूबर की सुबह किसान राजेंद्र सपाटे ने कुएं में कूदकर आत्महत्या की
- करीब 5 एकड़ की धान फसल पावस की कमी से पूरी तरह बर्बाद हो गई थी
- 3 अक्टूबर को पालकमंत्री पंकज भोयर के सामने आंसुओं में व्यथा मांडली थी
- पुलिस ने पंचनामा शुरू किया; गांव में तनाव, जिले भर में संतप्त प्रतिक्रिया
- तुमसर-मोहाडी क्षेत्र को दुष्काळ सूची से बाहर रखने पर किसानों में नाराजी
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