भंडारा: कमजोर मानसून का असर अब जमीन के नीचे के पानी पर भी गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। Groundwater Surveys and Development Agency (GSDA) के अनुसार नागपुर मंडल — जिसमें भंडारा भी शामिल है — का भूजल स्तर सितंबर 2026 के अंत में पिछले पांच वर्षों के औसत से 42 प्रतिशत नीचे रहा।
मंडल के छह जिलों के 622 निरीक्षण कुओं के आधार पर यह आकलन किया गया। चंद्रपुर 73 प्रतिशत गिरावट के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि नागपुर जिले में 52 प्रतिशत और वर्धा में 55 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। कमजोर बारिश के बाद यह गिरावट रबी सीजन की फसलों के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
भंडारा पहले से ही सूखे की चपेट में है — जिले की भंडारा, पावनी और लाखांदूर तहसीलें Trigger-1 के तहत घोषित हैं। भूजल में इतनी बड़ी गिरावट से पेयजल आपूर्ति और रबी की बुवाई दोनों पर संकट की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि कई इलाकों में खेती और पीने का पानी भूजल पर ही निर्भर है।
विशेषज्ञों के अनुसार भूजल स्तर में यह गिरावट मानसून की अपर्याप्त वापसी और जल पुनर्भरण की कमी का नतीजा है। प्रशासन को अब रबी सीजन से पहले पेयजल योजना और फसल संरक्षण के लिए विशेष तैयारी करनी होगी, ताकि ग्रामीण इलाकों में जलसंकट न बढ़े।
भंडारा: GSDA रिपोर्ट की मुख्य बातें — भूजल गिरावट
- GSDA की सितंबर-अंत रिपोर्ट: नागपुर मंडल में भूजल 5 साल के औसत से 42% नीचे
- चंद्रपुर में 73% गिरावट — सबसे ज्यादा प्रभावित; वर्धा में 55%, नागपुर जिले में 52% की कमी
- 622 निरीक्षण कुओं के सर्वेक्षण पर आधारित आकलन, कमजोर मानसून बना कारण
- भंडारा की 3 तहसीलें पहले से सूखे की Trigger-1 सूची में — रबी और पेयजल पर संकट की आशंका
- रबी बुवाई से पहले पेयजल योजना और फसल संरक्षण की विशेष तैयारी की जरूरत
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