बीड जिले में सूखे ने सोयाबीन उत्पादक किसानों की फसल बर्बाद कर दी है। फसल कटन प्रयोगों के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक बीड में सोयाबीन का प्रति हेक्टेयर उत्पादन करीब 73 प्रतिशत गिर गया है — पिछले पांच वर्षों का औसत उत्पादन 1,534.2 किलो प्रति हेक्टेयर था, जो इस साल सिर्फ 410 किलो रह गया है, यानी प्रति हेक्टेयर 1,124 किलो की गिरावट।
मराठवाड़ा में इस खरीफ मौसम में 46 लाख हेक्टेयर से ज्यादा बुवाई हुई थी, जिसमें 25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सोयाबीन बोई गई थी। लेकिन करीब 65 दिनों तक बारिश के लंबे अंतराल ने फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। कृषि विपणन विभाग के मुताबिक 13 अक्टूबर को राज्य की मंडियों में सिर्फ 12,044 क्विंटल सोयाबीन पहुंचा।
कर्ज कैसे चुकाएं, बीड के किसानों के सामने बड़ा सवाल
फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक लातूर, धाराशिव और बीड में सोयाबीन उत्पादन में 70 से 80 प्रतिशत की गिरावट आई है। बीड का बिंदुसरा जलाशय पिछले साल के पूर्ण स्तर के मुकाबले सिर्फ 5 प्रतिशत भरा है, और भूजल भी तेजी से गिरा है। कर्ज में डूबे किसानों के आर्थिक नियोजन का पूरा गणित बिगड़ गया है, और राहत की मांग तेज हो गई है।
मुख्य बातें
- प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1,534.2 किलो से गिरकर 410 किलो — 73% की गिरावट
- फसल कटन प्रयोग के शुरुआती आंकड़े; 13 अक्टूबर को सिर्फ 12,044 क्विंटल आवक
- बिंदुसरा जलाशय सिर्फ 5% भरा, भूजल भी तेजी से गिरा
- किसानों के सामने कर्ज अदायगी का संकट; राहत की मांग तेज
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