अमरावती जिले में भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट को देखते हुए कलेक्टर आशीष येरेकर ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में बड़ा आदेश जारी किया है। सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, ग्राम पंचायत और नगर परिषद के पेयजल स्रोतों को 'संरक्षित स्रोत' घोषित किया गया है, और इन स्रोतों के 500 मीटर के दायरे में नया कुआं या बोरवेल खोदने पर रोक लगा दी गई है।
यह पाबंदी कृषि, औद्योगिक, व्यावसायिक और निजी — सभी तरह के नए कुओं और बोरवेल पर लागू होगी और जिले के पूरे राजस्व क्षेत्र में 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी — पंप, पाइपलाइन, केबल और बोरवेल मशीनरी जब्त की जाएगी और महाराष्ट्र भूजल अधिनियम 2009, महाराष्ट्र सिंचाई अधिनियम 1976, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई भी होगी।
जल-संकट घोषित गांवों में 1 किलोमीटर के दायरे में भूजल दोहन पर अतिरिक्त प्रतिबंध रहेंगे, और अवैध कृषि पंपों की बिजली MSEDCL काटेगी। अमरावती, मोर्शी, चांदुर रेलवे, दर्यापुर, धारणी, अचलपुर और तिवसा-भातकुली के उपविभागीय अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है; शहरी निकायों को 16 अक्टूबर से पानी की खपत में कम से कम 10 प्रतिशत कटौती करनी होगी।
मुख्य बातें
- अमरावती में कलेक्टर का आदेश — पेयजल स्रोतों के 500 मीटर में नया कुआं/बोरवेल नहीं
- पाबंदी 30 जून 2027 तक; उल्लंघन पर मशीनरी जब्त + आपराधिक कार्रवाई
- जल-संकट वाले गांवों में 1 किमी दायरे में दोहन पर रोक; अवैध पंपों की बिजली कटेगी
- 16 अक्टूबर से शहरी निकायों को पानी की खपत में कम से कम 10% कटौती
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