वाशिम जिले में जलसंकट गहराता जा रहा है। 1 से 10 अक्टूबर के बीच जिले के मध्यम और लघु प्रकल्पों का जलसाठा 3.87% घट गया। मध्यम प्रकल्पों में 1 अक्टूबर को 31.8% साठा था, जो 10 अक्टूबर को घटकर 30.53% रह गया। जिले के 2 मध्यम और 77 लघु प्रकल्प प्रभावित हैं; इस साल औसत से 38.7% कम बारिश हुई है।
भूजल भी नीचे
भूजल सर्वेक्षण के अनुसार सितंबर 2026 अंत तक जिले की भूजल पातली पिछले 5 साल के औसत से 1.11 मीटर नीचे गिर गई। 79 निरीक्षण विहिरों का डेटा बताता है कि 5 साल की अक्टूबर-औसत पातली 0.97 मीटर थी, जबकि इस बार सितंबर अंत तक 2.08 मीटर गहरी हो गई। तालुका-वार गिरावट: कारंजा 2.07 मीटर (सबसे ज्यादा), मंगरुळपीर 1.36, मानोरा 1.15, मालेगाव 0.81, रिसोड 0.70, वाशिम 0.58।
रब्बी पर खतरा
अक्टूबर की शुरुआत से तापमान 33-35 डिग्री सेल्सियस रहा — वाष्पीकरण से साठे पर और दबाव पड़ा। सभी 6 तालुकों में पातली घटी है; रब्बी सिंचाई और पेयजल दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने पानी जपून इस्तेमाल करने की अपील की है।
मुख्य बातें
- 1-10 अक्टूबर में वाशिम के मध्यम+लघु प्रकल्पों का जलसाठा 3.87% घटा।
- मध्यम प्रकल्प: 31.8% से घटकर 30.53%; 2 मध्यम, 77 लघु प्रकल्प प्रभावित।
- इस साल औसत से 38.7% कम बारिश; तापमान 33-35 डिग्री।
- भूजल पातली 5 साल के औसत से 1.11 मीटर नीचे गिरी।
- सबसे ज्यादा गिरावट कारंजा में (2.07 मीटर); सभी 6 तालुकों में पातली घटी।
- रब्बी सिंचाई और पेयजल दोनों पर खतरा; पानी बचाने की अपील।
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