महाराष्ट्र में भीषण सूखे की स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की 11 सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम 8 से 11 अक्टूबर तक राज्य के दौरे पर है। यह टीम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपे गए राहत प्रस्ताव के बाद गठित की गई है।
टीम को तीन दलों में बांटा गया है। पहला दल पश्चिमी महाराष्ट्र के अहिल्यानगर, सोलापुर और पुणे का आकलन करेगा, दूसरा दल मराठवाड़ा के छत्रपती संभाजीनगर, बीड और जालना जाएगा, जबकि तीसरा दल विदर्भ के नागपुर और यवतमाळ का दौरा करेगा। टीम में कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, पेयजल आपूर्ति, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, पशुपालन और वित्त विभागों के अधिकारी, नीति आयोग और अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बुधवार को अमित शाह से मुलाकात कर केंद्र से वित्तीय सहायता मांगी थी। फडणवीस के अनुसार, राज्य की 80 प्रतिशत तहसीलें भीषण सूखे की चपेट में हैं और अब तक करीब 23,000 गांवों में फसल नुकसान का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। केंद्रीय टीमें पहले कर्नाटक का दौरा कर चुकी हैं। NDRF के तहत राहत का फैसला राज्य सरकार की रिपोर्ट और केंद्रीय टीम के आकलन के आधार पर होगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस बार सितंबर के अंत में ही सूखा घोषित कर दिया था, जबकि पहले के वर्षों में यह घोषणा नवंबर के अंत या दिसंबर में होती थी। समय से पहले घोषणा का मकसद किसानों को समय पर सहायता पहुंचाना बताया गया है।
मुख्य बातें
- 11 सदस्यीय केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम 8 से 11 अक्टूबर तक महाराष्ट्र दौरे पर
- तीन दल: अहिल्यानगर-सोलापुर-पुणे; संभाजीनगर-बीड-जालना; नागपुर-यवतमाळ
- फडणवीस ने 7 अक्टूबर को अमित शाह से मिलकर NDRF सहायता मांगी
- राज्य की 80 प्रतिशत तहसीलें भीषण सूखे की चपेट में — CM का दावा
- 23,000 गांवों में फसल नुकसान सर्वे पूरा, NDRF राहत का फैसला आकलन के बाद
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