केंद्र सरकार ने नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर रोधी दवाओं के ट्रेड मार्जिन को एमआरपी के 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के इस फैसले से इन दवाओं के दाम 70 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है, जिससे मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी।
यह कैप ब्रांडेड और जेनेरिक, घरेलू और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड — सभी तरह की कैंसर रोधी दवाओं पर लागू होगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के विश्लेषण में पाया गया था कि नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर औसतन करीब 170 प्रतिशत का मार्क-अप लगाया जा रहा था, जो कुछ मामलों में 700 प्रतिशत से भी ज्यादा था।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की विशेषज्ञ समिति दवाओं की अंतिम सूची तैयार करेगी, जिसके बाद एनपीपीए औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा। निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि दवाओं की कमी न हो।
यह फैसला 2019 के हस्तक्षेप पर आधारित है — तब 42 दवाओं पर कैप लगाने से एमआरपी 91 प्रतिशत तक घटा था और 526 ब्रांडों में मरीजों को 984 करोड़ रुपये की सालाना बचत हुई थी। भारत में कैंसर की घटना दर प्रति लाख करीब 60 है।
मुख्य बातें
- ट्रेड मार्जिन एमआरपी का 30% तय
- दामों में 70% तक कमी की उम्मीद
- सालाना 2,500 करोड़ की बचत
- औसत मार्क-अप 170%, कहीं 700% से ज्यादा
- 2019 में 42 दवाओं पर ऐसा ही कैप लगा था
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