ऐतिहासिक रजत: नितेश सिवाच ने 64 साल बाद ग्रीको-रोमन कुश्ती में दिलाया पदक
नागोया, जापान | 1 अक्टूबर — हरियाणा के नितेश सिवाच ने 1 अक्टूबर को एशियन गेम्स 2026 में ग्रीको-रोमन कुश्ती के 97 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर 64 साल का इंतजार खत्म कर दिया। फाइनल में उन्हें जापान के यूरी नकाजातो ने 4-0 से हराया, लेकिन नितेश भारत के पहले ग्रीको-रोमन पहलवान बने जो 1962 के बाद एशियाड के फाइनल तक पहुंचे।
इससे पहले 1962 के एशियन गेम्स में मलवा सिंह (52 किग्रा) और गणपत आंडलकर (97 किग्रा से ऊपर) ने ग्रीको-रोमन कुश्ती में स्वर्ण पदक जीते थे। तब से यह भारत का पहला ग्रीको-रोमन पदक है। फाइनल में नकाजातो ने पहले हाफ में 2-0 की बढ़त बनाई और दूसरे हाफ में टेकडाउन करके जीत पक्की की।
हरियाणा के जागसी गांव के रहने वाले 23 वर्षीय नितेश के पिता आनंद दूधिया हैं, जिन्होंने बेटे को पहलवान बनने का सपना दिखाया था। घुटने की गंभीर चोट और सर्जरी के बाद नितेश ने दो साल तक कुश्ती छोड़कर पिता के साथ दूध बांटने का काम किया था, लेकिन छह महीने की मेहनत के बाद स्कूल नेशनल्स में पदक जीतकर उन्होंने वापसी की और आज इतिहास रच दिया।
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