
मराठवाड़ा में सूखे से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की 11 सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम ने क्षेत्र के खेतों का दौरा किया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को छत्रपती संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों का दौरा किया; शनिवार (10 अक्टूबर) को धाराशिव का दौरा निर्धारित था।
संभागीय आयुक्त जी श्रीकांत ने टीम को बताया कि मराठवाड़ा में इस सीजन औसत बारिश का केवल 65.35 प्रतिशत ही हुआ है। क्षेत्र के 496 राजस्व मंडलों में से 37 में 30 दिन से ज्यादा और 155 में 21 से 30 दिन तक बारिश नहीं हुई। जलाशयों का भंडार 30.7 प्रतिशत रह गया है, जबकि जालना, धाराशिव और लातूर में भूजल 5 साल के औसत से 4-5 मीटर नीचे है।
611 टैंकर, 603 कुएं अधिग्रहीत
करीब 52 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल प्रभावित हुई है — सोयाबीन, कपास, गन्ना और तूर को भारी नुकसान पहुंचा है। पेयजल के लिए 10 जिलों में 611 टैंकर चल रहे हैं, जिनसे 517 गांवों और 2,147 बस्तियों को पानी मिल रहा है; 603 कुएं अधिग्रहीत किए गए हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने 10 अक्टूबर को सभी विभागों को सूखामुक्त महाराष्ट्र के लिए समन्वित काम करने का निर्देश दिया है।
टीम रविवार तक दौरा करेगी और फिर CM फडणवीस के साथ समीक्षा के बाद केंद्र को रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट से सूखा राहत पैकेज की दिशा तय होगी।
मुख्य बातें
- 11 सदस्यीय केंद्रीय टीम का दौरा
- 496 में से 192 मंडलों में लंबे समय तक सूखा
- 611 टैंकरों से पेयजल, 603 कुएं अधिग्रहीत
- 52 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल प्रभावित
- रविवार को CM के साथ समीक्षा, फिर रिपोर्ट
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