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जीएसटी काउंसिल की बड़ी राहत: अरेस्ट पावर खत्म, ₹5 करोड़ तक के मामलों में मुकदमा नहीं

जीएसटी काउंसिल की बड़ी राहत: अरेस्ट पावर खत्म, ₹5 करोड़ तक के मामलों में मुकदमा नहीं
चित्र: Wikimedia Commons (आर्काइव)
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जीएसटी काउंसिल: अरेस्ट पावर खत्म

नई दिल्ली में गुरुवार (8 अक्टूबर) को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में करदाताओं को बड़ी राहत देने वाले कई फैसले लिए गए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में जीएसटी अधिकारियों की अरेस्ट पावर (धारा 69) खत्म करने की सिफारिश की गई — इसे लागू करने के लिए संसद से सीजीएसटी एक्ट में संशोधन और अधिसूचना जारी करनी होगी।

बैठक में प्रॉसिक्यूशन की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई — यानी 5 करोड़ से नीचे के मामलों में अब मुकदमा नहीं चलेगा। सामान्य जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 रुपये किया गया है, और 10,000 रुपये से नीचे के जीएसटी शो-कॉज नोटिस अब जारी ही नहीं होंगे; लंबित नोटिस वापस लिए जाएंगे।

कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अनुमति दी गई है, साथ ही टेलीकॉम टावरों और फैक्ट्री के बाहर की पाइपलाइनों पर भी ITC का विस्तार किया गया। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए अपंजीकृत राइडर्स की डिलीवरी सेवाओं पर 5% जीएसटी लगेगा।

अगर सप्लायर टैक्स लेकर जमा न करे तो ईमानदार खरीदारों के ITC के मुद्दे पर अधिकारियों की समिति अध्ययन करेगी और 3 महीने में रिपोर्ट देगी। मोटर वाहनों पर ITC का फैसला अगली बैठक तक टाल दिया गया है, और जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया — अब दरों की समीक्षा साल में एक बार अलग बैठक में होगी। ज्यादातर बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे।

उद्योग जगत ने इन सुधारों का स्वागत किया है, हालांकि झारखंड ने डिक्रिमिनलाइजेशन का विरोध करते हुए कोयले पर वैट की मांग रखी है।

मुख्य बातें

  • 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में 57वीं बैठक
  • धारा 69: अरेस्ट पावर हटाने की सिफारिश
  • प्रॉसिक्यूशन सीमा 1 से बढ़कर 5 करोड़ रुपये
  • जुर्माना 25 हजार से घटकर 10 हजार
  • 10 हजार से नीचे के नोटिस नहीं जारी होंगे
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