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गोंदिया: आंगनवाड़ी सेविकाओं को हाईकोर्ट राहत, 55 साल तक प्रमोशन

गोंदिया: आंगनवाड़ी सेविकाओं को हाईकोर्ट राहत, 55 साल तक प्रमोशन
तस्वीर: तरुण भारत (प्रतीकात्मक)
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गोंदिया: आंगनवाड़ी सेविकाओं को हाईकोर्ट राहत, 55 साल तक प्रमोशन

गोंदिया सहित पूरे महाराष्ट्र की आंगनवाड़ी सेविकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पर्यवेक्षिका पद पर पदोन्नति के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष तय करने वाले राज्य सरकार के 3 जुलाई 2026 के शासनादेश को उच्च न्यायालय की नागपुर और कोल्हापुर पीठ ने रद्द कर दिया है, और 55 वर्ष की आयु सीमा बहाल कर दी है। न्यायालय ने सरकार को 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा रखते हुए पर्यवेक्षक पद के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।

फरीदा मुस्ताक मुल्ला बनाम महाराष्ट्र सरकार (रिट याचिका 4045/2026) में न्यायालय ने कहा कि 50 वर्ष की सीमा तय करने का कोई औचित्य नहीं है — यह भेदभावपूर्ण है और वरिष्ठ सेविकाओं को पदोन्नति से वंचित कर कनिष्ठों को आगे बढ़ाएगी। न्यायालय ने 17 नवंबर 2001 के शासनादेश और 7 दिसंबर 2001 के सुधारपत्र को ही वैध माना, जिनमें अधिकतम आयु 55 वर्ष थी।

गोंदिया जिले की आंगनवाड़ी सेविकाओं को भी इस फैसले का सीधा फायदा मिलेगा — यह आदेश पूरे महाराष्ट्र पर लागू है। नया विज्ञापन आने पर 55 वर्ष तक की सेविकाएं पर्यवेक्षिका पद के लिए आवेदन कर सकेंगी। हालांकि आंगनवाड़ी कर्मचारी संगठन का कहना है कि आयु सीमा के साथ शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा भी सुलझना चाहिए, ताकि 12वीं उत्तीर्ण सेविकाओं को भी अवसर मिल सके। एकीकृत बाल विकास आयुक्त माधवी सरदेशमुख ने कहा है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के फैसले व सरकार के निर्णय के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

  • गोंदिया सहित महाराष्ट्र की आंगनवाड़ी सेविकाओं को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
  • 3 जुलाई 2026 का शासनादेश रद्द: पर्यवेक्षिका पद पर 50 साल की आयु सीमा खत्म, 55 साल बहाल
  • फरीदा मुस्ताक मुल्ला बनाम महाराष्ट्र सरकार — न्यायालय ने सीमा को भेदभावपूर्ण बताया
  • 55 साल की अधिकतम आयु सीमा के साथ नया विज्ञापन जारी करने के निर्देश
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