मुंबई — ओल्ड मॉन्क बनाने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि ठाणे यूनिट से बिक्री पर लगी रोक से कंपनी को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। कंपनी के वकील वेंकटेश ढोंड ने कहा कि करीब 300 मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
मामला चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के सामने था। ढोंड ने कहा कि बिक्री प्रतिबंध से महाराष्ट्र के एक्साइज विभाग को भी करीब 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वहीं FSSAI का कहना है कि बोतल पर रम की जगह रम जैसा लेबल लगाकर ही बिक्री की अनुमति मिलेगी।
अगस्त में FSSAI ने कुछ व्हिस्की और रम ब्रांडों के चुनिंदा वैरिएंटों पर बिक्री पर रोक लगाई थी। नियामक का कहना था कि इन उत्पादों में कृत्रिम या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर मिला था, जिससे ये घटिया श्रेणी में आते हैं। कंपनी का कहना है कि दूसरी रियासतों में यही उत्पाद आज भी बिक रहा है। अदालत 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगी।
मुख्य बातें
- बिक्री रोक से कंपनी को ₹500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
- एक्साइज विभाग को ₹350 करोड़ के राजस्व की चपत, 300 मजदूर बेरोजगार
- FSSAI: रम नहीं, 'रम जैसा' लेबल लगाकर ही बिक्री मिलेगी
- 23 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट में अगली सुनवाई
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