NSDL के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजारों से ₹44,166 करोड़ की शुद्ध निकासी की है। 11 अक्टूबर को जारी इन आंकड़ों के साथ 2026 में अब तक FPI की कुल शुद्ध निकासी ₹3.04 लाख करोड़ तक पहुंच गई है — जो पूरे 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से करीब दोगुनी है।
बिकवाली के पीछे के कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण हैं — कच्चे तेल के ऊंचे दाम और खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति का जोखिम, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर जाना, और उत्तरी एशिया के बाजारों में AI शेयरों की रैली, जिसने वैश्विक पूंजी को भारत से दूर खींचा है। सितंबर में भी FPI ने ₹35,861 करोड़ की शुद्ध निकासी की थी, जबकि जुलाई (+₹20,200 करोड़) और अगस्त (+₹29,631 करोड़) में उन्होंने खरीदारी की थी।
घरेलू निवेशकों का सहारा
हालांकि विशेषज्ञ इसे भारत की कमजोरी नहीं मान रहे। Trackk के CEO Vedant Gupte का कहना है कि यह वैश्विक पूंजी का पुनर्संतुलन है और घरेलू निवेशक इस बिकवाली को संभाल रहे हैं। वहीं Geojit के VK Vijayakumar ने चेतावनी दी है कि 2026 में निफ्टी अब तक 13.87 प्रतिशत गिर चुका है और जब तक बॉन्ड यील्ड ऊंची रहेगी, बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है।
मुख्य बातें
- अक्टूबर में अब तक FPI ने भारतीय शेयरों से ₹44,166 करोड़ निकाले (NSDL आंकड़े)।
- 2026 में कुल शुद्ध निकासी ₹3.04 लाख करोड़ — पूरे 2025 (₹1.66 लाख करोड़) से दोगुनी।
- सितंबर में भी ₹35,861 करोड़ की निकासी; जुलाई-अगस्त में खरीदारी हुई थी।
- कारण: महंगा कच्चा तेल, खाड़ी आपूर्ति जोखिम, मजबूत डॉलर, US बॉन्ड यील्ड 5.2% पार।
- उत्तरी एशिया में AI-रैली ने वैश्विक पूंजी को भारत से दूर खींचा।
- Trackk के Vedant Gupte: यह वैश्विक पुनर्संतुलन है, भारत की कमजोरी नहीं।
- Geojit के VK Vijayakumar: निफ्टी 2026 में 13.87% गिरा; यील्ड ऊंची रही तो बिकवाली जारी।
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