वर्धा: वर्धा जिले में इस बार मानसून ने बड़ी मार दी है — यहां सामान्य से 36.92 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे जलसंकट का खतरा गहरा गया है। वर्धा के किसानों की मांग पर प्रशासन ने जिले के चार जलाशयों से पानी छोड़ने का फैसला किया है, ताकि फसलों और पेयजल दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।
गौरतलब है कि वर्धा जिले के आठ में से सात तालुकों — वर्धा, देवली, आष्टी, आर्वी, सेलू, हिंगणघाट और समुद्रपुर — को पहले ही सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। वर्धा के सरपंच संगठन की मांग है कि आठवें तालुके कारंजा को भी सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल किया जाए; ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
कम बारिश का असर वर्धा के खेतों के साथ-साथ भूजल पर भी पड़ा है — जमीन में पर्याप्त पानी का रिसाव नहीं होने से पानी का स्तर गिर गया है, और सर्दी के दिनों में कई गांवों में पानी की कमी की आशंका जताई जा रही है। विदर्भ के कई जिलों में स्थिति चिंताजनक है: नागपुर और वर्धा में सामान्य से करीब 34 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
वर्धा के किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में पर्याप्त नमी नहीं मिलने से कपास, सोयाबीन और तुअर की फसलों को नुकसान हुआ है; अब रबी की बुआई से पहले खेतों में पानी पहुंचना बेहद जरूरी है। प्रशासन का कहना है कि जलाशयों से छोड़े गए पानी का उपयोग किसानों की सिंचाई जरूरतों और पेयजल आपूर्ति दोनों के लिए संतुलित तरीके से किया जाएगा।
सात तालुके पहले ही सूखाग्रस्त घोषित
- वर्धा: सामान्य से 36.92% कम बारिश — जिले में जलसंकट का खतरा गहराया, किसानों की मांग पर चार जलाशयों से छोड़ा गया पानी
- वर्धा के आठ में से सात तालुके (वर्धा, देवली, आष्टी, आर्वी, सेलू, हिंगणघाट, समुद्रपुर) पहले ही सूखाग्रस्त घोषित
- वर्धा में सरपंच संगठन की मांग — आठवें तालुके कारंजा को भी सूखाग्रस्त घोषित करो, नहीं तो उग्र आंदोलन
- कम बारिश से वर्धा में भूजल स्तर गिरा; कपास-सोयाबीन-तुअर की फसलों को नुकसान, रबी से पहले सिंचाई की जरूरत
Comments
Post a Comment