नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका खारिज कर दी — स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग (BC) को 34% आरक्षण देने के दोनों शासकीय आदेश (GO) रद्द रहेंगे। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 1 अक्टूबर के आदेश को 'बहुत ही उचित' (very reasonable) बताया।
आंध्र सरकार ने ग्रामीण स्थानीय निकायों में BC को 34% और शहरी निकायों में 33.33% आरक्षण के GO जारी किए थे। अदालत ने कहा कि इससे SC+ST+BC का कुल आरक्षण 50% की सीमा (इंद्रा साहनी, 1992) को पार कर जाता है — और सरकार के एकीकृत/व्यापक पारिवारिक सर्वेक्षण का डेटा पिछड़ेपन के 'अनुभवजन्य आकलन' के लिए नाकाफी है। पीठ ने सवाल किया — 'यह किस कानून के तहत बनाया जा रहा है?'
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को यह कोटा घोषित किया था (2024 विधानसभा चुनाव का वादा)। राज्य ने राजीव रंजन मिश्रा आयोग बनाया था, लेकिन कोई फील्ड सर्वे नहीं हुआ। यह पहली बार नहीं — मार्च 2020 में भी AP हाईकोर्ट ने YSR कांग्रेस सरकार का 34% BC कोटा रद्द किया था (तब कुल आरक्षण 59.85% था)।
राहत की बात — अदालत ने संभावना बंद नहीं की: सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के मुताबिक सही अनुभवजन्य प्रक्रिया के बाद कोटा दोबारा लाया जा सकता है।
34% BC कोटा — मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को AP सरकार की अपील खारिज; हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
- ग्रामीण निकायों में 34%, शहरी में 33.33% BC आरक्षण रद्द
- 50% सीमा पार करता था कुल आरक्षण; सर्वे डेटा नाकाफी
- नायडू ने 18 अगस्त को घोषित किया था (2024 का चुनावी वादा)
- सही प्रक्रिया के बाद कोटा दोबारा लाने की संभावना खुली
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