अमरावती जिले के वरुड तालुका के जरुड गांव के सरकारी पंजीकृत कंत्राटदार सुनील वागद्रे (42) ने अपने खेत में जान दे दी। कंत्राटदार संघटनाओं का दावा है कि सरकारी विभागों में 2 से 4 साल से अटके करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये के बिलों के बोझ से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
संघटनाओं के मुताबिक आदिवासी विकास, लोक निर्माण और ग्रामीण विकास विभागों में वागद्रे के बिल प्रलंबित थे। भुगतान के लिए वे लगातार मंत्रालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन रकम नहीं मिली।
आर्थिक बोझ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वागद्रे पर निजी बैंक का करीब 30 लाख रुपये का कर्ज, 30 लाख की कैश क्रेडिट और निर्माण कार्य के लिए ली गई करीब 50 लाख रुपये की उधारी थी।
महाराष्ट्र राज्य कंत्राटदार महासंघ, राज्य अभियंता संघटना और जलापूर्ति कंत्राटदार संघ (अध्यक्ष मिलिंद भोसले) ने इसे थकित बिलों से जुड़ी 9वीं आत्महत्या बताया है। संघटनाओं ने CM फडणवीस को पत्र लिखकर तत्काल भुगतान की मांग की है और 10 अक्टूबर को शाम 4 बजे ऑनलाइन बैठक में अगले आंदोलन पर फैसला होगा।
मुख्य बातें
- सुनील वागद्रे (42), जरुड गांव, वरुड तालुका
- 2-4 साल से 2.5 करोड़ के बिल प्रलंबित
- आदिवासी विकास, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास विभाग
- 30 लाख बैंक कर्ज + 50 लाख उधारी का बोझ
- संघटनाओं का दावा: महाराष्ट्र में 9वीं घटना
Comments
Post a Comment