केंद्र सरकार ने शनिवार रात (10 अक्टूबर) ड्राफ्ट नेशनल स्टील पॉलिसी पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी कर दी है। रॉयटर्स, इकोनॉमिक टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया की 11 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक इस नीति में 2047 तक देश की कच्चे इस्पात की क्षमता 60.4 करोड़ टन (604 मिलियन टन) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा करीब 22 करोड़ टन से लगभग तीन गुना है।
नीति का दूसरा बड़ा लक्ष्य हरित इस्पात है। कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता मौजूदा 2.54 टन कार्बन डाइऑक्साइड प्रति टन कच्चा इस्पात से घटाकर करीब 1.54 टन करने का प्रस्ताव है, जो 2070 तक नेट-ज़ीरो के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
ड्राफ्ट में कच्चे माल की सुरक्षा पर भी जोर है। 2047 तक लौह अयस्क की मांग 772 मिलियन टन और कोकिंग कोल की मांग 236 मिलियन टन रहने का अनुमान है। इसके लिए विदेशी परिसंपत्तियों और संयुक्त उद्यमों के जरिए उच्च-श्रेणी के भंडार सुरक्षित करने और रणनीतिक वैश्विक आउटरीच से सोर्सिंग में विविधता लाने की योजना है।
यह नई नीति 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति (जिसका क्षितिज 2030 था) की जगह लेगी। भारत की क्रूड स्टील क्षमता वित्त वर्ष 2025 में 220 मिलियन टन थी, जिसके वित्त वर्ष 2031 तक 294 मिलियन टन होने का अनुमान है।
मुख्य बातें
- 10 अक्टूबर की रात ड्राफ्ट पॉलिसी जारी हुई।
- 2047 तक 604 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य।
- उत्सर्जन तीव्रता 2.54 से घटकर 1.54 टन होगी।
- लौह अयस्क की मांग 772 मिलियन टन का अनुमान।
- 2017 की इस्पात नीति की जगह लेगी।
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