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2026 का मानसून 13% की कमी के साथ समाप्त, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन

2026 का मानसून 13% की कमी के साथ समाप्त, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन

2026 का मानसून 13% की कमी के साथ समाप्त, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून बुधवार, 30 सितंबर को 13%
2026 का मानसून 13% की कमी के साथ समाप्त, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन

नई दिल्ली | 30 सितंबर — भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून बुधवार, 30 सितंबर को 13% की कमी के साथ समाप्त हुआ। जून से सितंबर के बीच देश में कुल 759.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो 1971-2020 के दीर्घकालिक औसत (LPA) 868.6 मिलीमीटर का 87% है। यह 2001 के बाद चौथी सबसे कम और 1901 के बाद 13वीं सबसे कम मौसमी वर्षा है। मौसम विभाग के मुताबिक, कमजोर मानसून की मुख्य वजह एल-नीनो की स्थितियां रहीं।

मौसम विभाग के अनुसार, जून मानसून का सबसे कमजोर महीना रहा — सिर्फ 65% सामान्य वर्षा हुई (106.8 मिमी बनाम मासिक औसत 165.3 मिमी)। जुलाई में स्थिति सुधरी और वर्षा सामान्य से 1% अधिक रही, लेकिन अगस्त और सितंबर में कमी बनी रही। सितंबर के आखिरी हफ्ते में अचानक तेजी आई और वर्षा सामान्य से 49% अधिक रही — ठीक उसी समय जब उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू हुई।

पश्चिम राजस्थान से मानसून की वापसी 19 सितंबर को शुरू हुई, जो सामान्य तिथि 17 सितंबर से दो दिन देरी से थी। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 28% और पूर्व-उत्तर-पूर्व भारत में 25% की सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई, जबकि देश के 282 जिले — यानी कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 38% — कम वर्षा की श्रेणी में रहे।

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा के अनुसार अक्टूबर में भी देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम (LPA का 85%) रहने की संभावना है, जबकि अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेंगे।

कमजोर मानसून का सीधा असर खरीफ की बुआई पर पड़ा। 25 सितंबर तक देश में 110.8 मिलियन हेक्टेयर में बुआई हुई, जो पिछले साल के 112.1 मिलियन हेक्टेयर से 1.2% कम है। धान की बुआई 3.6% घटकर 43.1 मिलियन हेक्टेयर रह गई, हालांकि दालों की बुआई 2% बढ़ी। देश के 150 बड़े जलाशयों में जल भंडार भी पिछले साल के स्तर से नीचे चल रहा है।

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